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वक़्त कहाँ कैसे उड़ गया पता ही नही चला ।

माँ ने सन दो हज़ार छब्बीस के स्पेस कैलेंडर पर नज़र दौड़ाई ! घर मे आज जैसे सफ़ाई अभियान छिड़ा था । कुछ तो खास होने वाला था ।

“ सोमी .. पूरा घर चमकना चाहिए , ऊपर नीचे छत आँगन सब साफ करना … अमित आएगा आज टाइटन ग्रह से , पूरे छै साल बाद … ! “ माँ पूरे जोश में घर की मेड, सोमी, को बता रही थी ।

सोमी ने मुस्कुराकर कहा , “अम्माजी आप लकी हो जो मैं जीती जागती चलती फिरती इंसान आपको मिल गयी वरना दूसरे घरों में रोबोट्स के नखरे देखे आपने …!?

‘ अरे तुम लोग क्यूँ जान दे रही हो ,अमित को बिल्कुल पसंद नही था ये सब उसे सब वैसा ही देखना है जैसा वो पृथ्वी पर छोड़ गया था … । ‘ डैड ने बातों में दखल दिया ।

“ अमित का तो ठीक है पर चिंता उसकी है जिसे वो साथ ला रहा है , तुम्हे निभाना पड़ेगा अब … “ .. वो अपनी रो में बोले जा रहे थे ।

माँ के अंदर कुछ कचोट गया .. ! कौन होगी वो , कैसी होगी , . हज़ारो सवाल चल रहे थे जबसे ख़बर आयी थी दोनों के आने की ।

सोमी नए जमाने की लड़की थी , बोली , “ अम्मा जी आपकी सास के ज़माने में शादियां होती थीं , आप के समय तक लिव इन आ चुका था । आज का ज़माना तो … लिव आउट का है , मतलब पृथ्वी ग्रह को छोड़ कर दूसरे ग्रहों पर जाना और वहीं वहीं बस जाना । आप लकी हो कि बेटा बहू वापस तो आ रहे हैं ..! “ उसकी बातों में दम था ।

आकाश में उड़ती रोबोट चिड़िया को आज कोयल की आवाज़ फीड की गयी थी .. और गमले के फूलों में मोगरे की खुश्बू का सेंट …. डोरबेल बजी !

अमित ने आते ही माँ डैड को लिपटा लिया , कुशल क्षेम पूछने के बाद सब जिज्ञासु हो कर खड़े थे.

अमित ने उसका हाथ पकड़ा और दोनों से कहा , “ ये साई है माँ |

माँ अवाक् रह गयी..” साई ? …. पर यह तो… इससे पहले की वह आगे कुछ बोल पाती , अमित ने समझाया, हाँ यह साइबोर्गिया (अर्द्ध मानव अर्द्ध मशीन ) है | मैं प्यार से साई बुलाता हूँ

अमित ने फिर जो कुछ बताया उसे सुन कर घर मे सन्नाटा छा गया ।

यह मंगल की सिटीजन है , इसे मैंने पृथ्वी के वातावरण और वायुमंडल के लिए प्रोग्राम किया है दो हफ्ते के लिए !”.

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